गुरुवार, 8 मई 2014

तन्हाइयां

 








अक्सर तन्हाइयां मुझसे पूछती है
क्या मिला तुझको वफा करके
हो पूरी हर ख्वाहिश ये है जनून
उसने पाई हर खुशी और सकून
क्या मिला उसको मुझसे जफा करके
अक्सर तन्हाइयां ........................

दर्द है हर जगह गम फैला है हर सूं
मैने पाए है जख्मे जिगर के आंसू
क्या मिला मुझे खुद को फना करके
अक्सर तन्हाइयां ..........................

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (09.05.2014) को "गिरती गरिमा की राजनीति
    " (चर्चा अंक-1607)"
    पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  2. सुंदर !

    कृपया निम्नानुसार कमेंट बॉक्स मे से वर्ड वैरिफिकेशन को हटा लें।

    इससे आपके पाठकों को कमेन्ट देते समय असुविधा नहीं होगी।

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    अधिक जानकारी के लिए कृपया निम्न वीडियो देखें-

    http://www.youtube.com/watch?v=VPb9XTuompc

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन भारत का 'ग्लेडस्टोन' और ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. प्रएसी दर्द भरा.
    बहुत सुंदर प्रस्तुति ।

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