मंगलवार, 15 जनवरी 2013

हस्तीमल हस्ती




प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है,
नये परिन्दों को उड़ने में वक़्त तो लगता है |


जिस्म की बात नहीं थी उनके दिल तक जाना था,
लम्बी दूरी तय करने में वक़्त तो लगता है |


गाँठ अगर पड़ जाए तो फिर रिश्ते हों या डोरी,
लाख करें कोशिश खुलने में वक़्त तो लगता है |


हमने इलाज-ए-ज़ख़्म-ए-दिल तो ढूँढ़ लिया है,
गहरे ज़ख़्मों को भरने में वक़्त तो लगता है।                                                      -हस्तीमल हस्ती


2 टिप्‍पणियां:

  1. गाँठ अगर पड़ जाए तो फिर रिश्ते हों या डोरी,
    लाख करें कोशिश खुलने में वक़्त तो लगता है |superb

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