सोमवार, 21 जनवरी 2013

घाव


 भूलता कौन है वक्त के घाव को
वस्ल के खवाब की डूबती नाव को
आज टूट ही गए सब बांध सब्र के
रोका था कब से आँसु के बहाव को
कौन जाने वक्त कब खफा हो जाए
ता उम्र तरसो मेरे प्यार की छाव को

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी .बेह्तरीन अभिव्यक्ति.शुभकामनायें.
    आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.
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  2. yaar lagta hai aapka dil tut gaya hai.....koi nahi jindagi ko nae aayam do, yaha jindagi khatam nahi suru hoti hai....its not bad to be good but its very bad to be very good.

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