सोमवार, 13 मई 2013

चंद शेर

रोज  होते  है  हादसे  दिल  के
जख्म कब तक कोई गिने दिल के
******************************
यहाँ किसी से उम्मीदे वफा न रख नादाँ
यही समझ ले कि ये दौर पत्थरों का है
****************************
ये जख्मे इश्क है कोशिश करो हरा ही रहे
कसक नही जायगी अगर ये भर भी गया
********************************
उड़ते है वो हमेशा आसान सी हवा में
चालाक परिंदों के कभी पर नही कटते
********************************  

4 टिप्‍पणियां:

  1. यहाँ किसी से उम्मीदे वफा न रख नादाँ
    यही समझ ले कि ये दौर पत्थरों का है....
    बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी यह पोस्ट आज के (०८ अगस्त, २०१३) ब्लॉग बुलेटिन - श्री भीष्म साहनी से चलो मिल जाएँ पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

    उत्तर देंहटाएं