शनिवार, 23 फ़रवरी 2013

दर्द और दिल


जब दिल टूट जाये तो पूरा बदन दर्द का फोड़ा बन जाता है जब विश्वास टूटे तो विश्वास की टूटी किरचिया कैसे आँख फोडती है ?जब प्यार का असल रूप दिख जाता है तो सारा यकीन कैसे दुम दबा कर भाग जाता है?........हँसी की सूरत में सदा होठो पर सजा प्यार जब आँख का आंसू बन जाये तो दर्द, यूँही लम्हा लम्हा इंसान को रुलाता है, आंसू थमने का नाम ही नहीं लेते... जब विश्वास कि माला टूटती है तो उसके मोती इसी तरह बिखर जाते है.........कुछ पाने से पहले खोना तकलीफ देता है मगर पाकर खो देना बहुत ज्यादा तकलीफदेह होता है......ख्वाहिशे मारकर जिन्दा रहना आसान.. पर टूटे दिल के साथ, जिंदगी जीना मुश्किल होता है............



किर्ची किर्ची होकर बिखरे मेरे एहसासात
कतरा कतरा आंख से टपके मेरे सब जज्बात
मेरे उजड़े चमन को खिलाने अब कौन आएगा
जब माली खुद ही उजाड़ दे डाल और पात
फूलो को मसालों इन में भी होती है जान
फूल तो प्यार की होती है इक सौगात
सुखी लकड़ी जल उठती है चिंगारी से भी
क्यों दोहराते रहते हो तुम माजी के हालात 


1 टिप्पणी:

  1. बहुत उम्दा पंक्तियाँ ..... वहा बहुत खूब एक बहतरीन रचना

    मेरी नई रचना

    खुशबू

    प्रेमविरह

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