गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

दर्द


  
रीमा  को आज फिर रसौली का दर्द उठा है डाक्टर ने आपरेशन को कहा है ......रीमा लेटी है उठ नही पा रही है, बेटी ने घर का काम सम्हाल लिया है ,राजन (रीमा का पति) लैपटॉप पर फेसबुक लगा कर बैठे है ....बेटी ने रीमा को दर्द की दवा दी है ,रीमा दवा खा कर एक बार पति की तरफ देखती है वो आपने लेपटोप मे मस्त है रीमा धीरे से आँख बंद कर लेट जाती है .....दवा खाई है पर आराम नही है कुछ देर बाद पति ऑफिस जाने के लिए तैयार होते है बेटी खाना देती है ,और वो जल्दी जल्दी खा कर ऑफिस चले जाते है ,रीमा आपने दर्द को दबाए चुप चाप आँख बंद किए पड़ी है ......ऑफिस घर के पास है इसलिय पैदल ही चले जाते है और रोज दोपहर के भोजन पर घर आजाते है ......रोज की तरह दोपहर को आज भी घर आए एक चक्कर बेडरूम का लगा कर खाना खा कर चलेगाए ,रीमा अभी भी दर्द मे पड़ी है बेटी फिर से माँ को एक गोली दर्द की देती है पर दर्द मे कोई आराम नही है रीमा दर्द को सहते हुये आँख बंद किए पड़ी है दर्द मे कुछ आराम हो तो आँख भी लगे ......शाम को पति ऑफिस से आते है रीमा वैसे ही आँख बंद किए लेटी है पति की आहट पर आँख खोल के देखती है ,पति उसे देखता है और लेपटोप उठा कर दूसरे कमरे मे चला जाता है ,बेटी खाना बनती है ,पापा को खाना खिलाती है माँ के पास आती है माँ को जबर्दस्ती एक रोटी खिलाती है और दर्द की दो गोली देती है की, अब आराम मिल जाएगा माँ दवा खा कर फिर आँख बंद कर लेती है ,करीब दो तीन घंटे बाद पति रूम मे आता है अपने लेपटोप के साथ ॥रीमा आहट पर आँख खोल कर देखती है ....पति बगल मे ही लेपटोप लगा कर बैठ जाता है रीमा देखती रहती है ,एक घंटा दो घंटा फिर आँख बंद कर लेती है .....कुछ देर बाद पति को नींद आने लगती है वो लेपटोप बंद करता है बाथरूम जाने के लिए उठता है ,रीमा फिर आँख खोलती है ....पति कहता है सारा दिन सोती रहती हो फिर भी नींद आजती है ?....रीमा कुछ देर पति को देखती फिर हाँ कह कर आँख बंद कर लेती है पति लाइट बुझा कर सो जाता और रीमा अंधेरे मे आँख खोल .....गोली शायद असर कर रही है दर्द कम हो रहा है ....पर ये दूसरा दर्द नही सोने देगा ......

16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत पास फिर भी अंजान
    दर्द को क्यूँ लेते सङ्ग्यान

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  2. दर्द बिन बताए कौन सुनता है ...मार्मिक कहानी

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  3. उपासना जी ....ये एक विडम्बना ही तो है की औरत बिन बताए ही हर दर्द को समझ लेती है ....और पुरुष दर्द मे तड़पता देख भी नही समझ पता

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  4. बहुत सहज शब्दों से सजी भावपूर्ण रचना | बधाई |

    यहाँ भी पधारें और लेखन पसंद आने पर अनुसरण करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  5. दर्द..ताउम्र भले,,सीने से लगा रहता हैं !
    जख्म कैसे भी हो हर हाल में भर जाते हैं !!
    दिल मैं उतरें तो,, शायद कोई बात बने !
    लोग ऐसे हैं की,, नजरों से उतर जाते हैं !!

    ..........दफ्न होती संवेदनाओं की सिलसिलेदारी

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  6. गहन भाव छिपे हैं इस रचना में |
    आशा

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  7. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है ......
    सादर , आपकी बहतरीन प्रस्तुती

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    पृथिवी (कौन सुनेगा मेरा दर्द ) ?

    ये कैसी मोहब्बत है

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  8. बहुत ही भावपूर्ण रचना,आभार. आपका ब्लॉग "ब्लॉग कलश" पर शोभायमान है,पधारें.
    "ब्लॉग कलश"
    भूली-बिसरी यादें

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  9. dil chhu gaee ye rachna ,aise hi likhti rhen ,aaj shayd pahli baar aap ke blog par aaee hun ,acha lga yhan aakr

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  10. तकरीबन हर स्त्री को इस दर्द से गुज़ारना होता है...
    पुरुषों की संवेदना अपनी पत्नी के लिए कम ही देखने मिलती है...
    बहुत अच्छी पोस्ट..

    सादर
    अनु

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  11. यही संवेदनहीनता तो दर्द को कभी ख़त्म नहीं होने देती है । पुरुष प्रेम में ही संवेदनाये प्राप्त करता है और सहज देवत्व का गुण उसमे आ जाता है । अनीता जी आपने -बहुत सजीव चित्रण किया है अपने शब्दों द्वारा -

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